अक्षय तृतीया (आखातीज) आज
अक्षय तृतीया, जिसे आखातीज भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग केजरीवाल अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 'अक्षय' का अर्थ होता है, जो कभी क्षय न हो, यानीऔ जिसका कभी नाश न हो। इसी विश्वास के साथ इस दिन जो भी पुण्य कर्म, दान, पूजन या निवेश किया जाता है, वह अनंत गुणा होकर फल देता है।
अक्षय तृतीय कब है?
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वैशाख माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि आरंभ: 29 अप्रैल, रात्रि 08:18 पर
वैशाख माह शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि समाप्त: 30 अप्रैल शाम 06:05 मिनट पर
उदया तिथि के अनुसार अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को मनाई जाएगी।
अक्षय तृतीय सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त।
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30 अप्रैल, बुधवार प्रातः 5: 41 मिनट से लेकर दोपहर 2:12 मिनट तक रहेगा।
अक्षय तृतीया का महत्व
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हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के ही दिन भगवान परशुराम ने धरती पर अवतार लिया था। इस दिन को भगवान परशुराम के जन्मदिन के रूप में मानाया जाता है। वहीं एक पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन मां गंगा धरती पर उतरी थीं। इस दिन मां अन्नपूर्णा का भी जन्मदिन मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जो भी शुभ काम किए जाते हैं उसमें बढ़ोतरी होती है।
अक्षय तृतीया को जलपूर्ण घट, फल,पंखा, सत्तू,छाता आदि दान करना और ब्राह्मण भोजन करना चाहिए।
अक्षय तृतीया को किये गए पुण्य का क्षय अर्थात नाश नही होता है।इस कारण ही इसे अक्षय तृतीया कहते है।
इस दिन विशेष रूप से तीर्थ नदी आदि में स्नान करना चाहिए।
*आचार्य अविनाश शास्त्री*




