भगवान शिव साधुता की पहली और अंतिम पहचान: प्रोफेसर रामेश्वर मंडल
नोनपुर फरदी हाट के मैदान में विराट गुरु शिव महोत्सव में लाखों शिव शिष्य शामिल हुए।
सच आज तक संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
तेघड़ा/बेगूसराय
उत्तर तेघड़ा के पिपरा दोदराज पंचायत अंतर्गत नोनपुर फरदी हाट के मैदान में शनिवार को विराट शिव गुरु चर्चा का आध्यात्मिक महोत्सव का आयोजन हुआ। जिसमें ऐतिहासिक भीर देख लोग आश्चर्यचकित हो गए। जिसमें बेगूसराय जिला सहित आसपास के कई जिले एवं तेघड़ा प्रखंड क्षेत्र के भिन्न-भिन्न पंचायतों से शिव शिष्य परिवार के सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस शिव गुरु चर्चा में झारखंड के देवघर से आये शिव शिष्य परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष, यूनिवर्सिटी प्रोफेसर, डीन मानविकी संकाय सह विभागाध्यक्ष दर्शन शास्त्र प्रो रामेश्वर मंडल ने कहा कि आज भगवान शिव साधुता की पहली और अंतिम पहचान हें। उसकी पराकाष्ठा है शिव शिष्यता में कोई शिष्य गुरु नहीं है और न ही होंगे। शिव ही एकमात्र गुरु हें ।सर्वकालिक हें और रहेंगे। दया की याचना भक्ति की अभिव्यक्ति है। यह मात्र एक विचार नहीं अनुभूति है। मार्ग शिव शिष्यता का है और मंजिल भगवान शिव स्वयं। इसलिए कहा जाता है कि शिव की शिष्यता ग्रहण करना ही हमारा एकमात्र भक्ति का सुलभ विकल्प है। शिव के बिना इस धरती पर कुछ नहीं है। शिव जगत के गुरु हें । और हमेशा रहेंगे। इससे कोई मिटा नहीं सकता। शिव चर्चा के उद्देश्य धरती के जनमानस के बीच इस संवाद को पहुंचाना है। कार्यक्रम के मंच संचालन ललन शिव शिष्य शंभू पंडित के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के आयोजक नोनपुर के राम गति मालाकार एवं शिव शिष्या आशा देवी स्व परिवार ने किया। आगत अतिथि भागलपुर से रामनारायण शर्मा और प्रो रामेश्वर मंडल के साथ साथ हजारों के संख्या में भगवान शिव के प्रति श्रद्धा रखने वाले शिव शिष्य परिवार के गुरु भाई एवं गुरु बहना शामिल हुए।


