मनुष्य के लिए ईमानदारी ही सबसे बड़ा धर्म : आचार्य धर्मदास। संत रविदास की जयंती मनाई गई।
बीहट। बरौनी प्रखंड के प्रसिद्ध धर्मस्थली सिमरियाधाम के कबीर मठ के प्रांगण में गुरु पुर्णिमा के एवं रविदास जयंती के शुभ अवसर पर कबीर दिव्य ज्योति धर्म सेवा संस्थान के तत्वावधान में दो दिवसीय कबीर पंथ संत सम्मेलन आयोजित किया गया। अध्यक्षता फुहिया गद्दी के महंत आचार्य धर्मदास ने किया। आचार्य महंथ धर्मदास साहब ने संबोधित करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के कथनी और करनी में समानता होता है, उसके जिह्वा पर सरस्वती का वास हो जाता है । उसके बोलने मात्र से असमंभव भी संभव असाध्य भी साध्य हो जाता है। उन्होंने कहा बिनु सत्संग विवेक न होई । मनुष्य का ईमानदारी ही सबसे बड़ा धर्म है । आचार्य धर्मदास ने कहा संत रविदास का कहना था मन चंगा तो कठौती में गंगा।उन्होंन ने कहा फूहिया गद्दी की स्थापना 1834 इ0 में हुई । उसके बाद सत्संग के माध्यम से लोगों को अच्छे कर्म के लिए प्रेरित किया जा रहा है । मुख्य वक्ता डा० सुधीर पासवान ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य को शैक्षणिक और अध्यात्मिक दोनों गुरू बनाना चाहिए। इस मौके पर संत शिरोमणि द्वारा ध्वजारोहण किया गया। विशिष्ट अतिथिगण साध्वी जानकी दासिन, साध्वी रेखा, साध्वी हीरा दासिन सहित प्रदेशों के संतों ने अपने-अपने प्रवचन और भजन से अध्यात्मिक माहौल उत्पन्न कर दिया। आयोजक मंडल ने सभी अतिथियों को पुष्पों की माला पहनाकर तथा चादर से सम्मानित किया। इस मौके पर नेपाल के महंत हनुमान दास, राम बहादुर दास, राम रतन साहब, अरुण दास ,शत्रुघ्न दास, जवाहर दास, चंद्रदेव साहब,गंगा दास, राजाराम दास, पंकज दास आदि सत्संग प्रेमियों ने भाग लिया ।



