आज अपनी दुर्दशा पर बहा रहा आंसू-अनुमंडल का सबसे पुराना संस्कृत उच्च विद्यालय
सच आज तक संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
अंग्रेजों के जमाने में स्थापित तेघड़ा अनुमंडल का बरौनी एक स्थित पहले सबसे पुराना वाणी विलास संस्कृत उच्च विद्यालय सरकारी उदासीनता का शिकारसन 1928 में बना और 1956 में सरकारी मान्यता प्राप्त हुई।यह विद्यालय आज अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। किसी समय छात्र-छात्राओं से गुलजार रहने वाला यह विद्यालय अब धीरे-धीरे अमृत प्राय होता जा रहा है । जिससे सुधि लेने वाला अब कोई नहीं है।
*गौरवशाली अतीत का वर्तमान*
इस विद्यालय में पूर्व में जहां संस्कृत के विद्वान पंडित और आचार्य पदस्थापित थे वहां वेद, उपनिषद, ज्योतिष ,साहित्य, भाषा ज्ञान के अलावे रामचरितमानस आदि का पाठ पढ़ाया जाता था। यहां से पढ़ कर निकले छात्रों ने समाज में कई उच्च पदों पर रहते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया । लेकिन समय और सरकारी उपेक्षाओं के चलते यह विद्यालय आज बदहाली की कगार पर पहुंच चुका है।
स्थानीय बाजार के व्यवसायी व बरौनी के भूमिदाता स्वर्गीय राम अवतार ने भारत की प्राचीनतम भाषा संस्कृत शिक्षा के प्रसार के लिए इस विद्यालय की स्थापना किया था।
तेघड़ा बरौनी सड़क के किनारे स्थित विद्यालय भवन किसी जर्जर धरोहर की याद दिलाता नजर आ रहा है। इस विद्यालय का नवनिर्मित खपरैल भवन मरम्मत के अभाव में खंडहर नुमा बनता जा रहा है । उसे किसी जीर्णोद्धार की दरकार है। पुरानी खपरैल भवन भी जर्जर हो चुका है। तेघड़ा विधायक राम रतन सिंह द्वारा अनुशंसित दो भवन में आशंकाओं के बीच बच्चों की पढ़ाई हो रही है। जगह के अभाव में विधान पार्षद मदन मोहन झा के कोष से प्राप्त उपस्करों को रखा गया है। बच्चों के लिए शैक्षणिक उपकरणों यथा ग्लोब, भौगोलिक नकशा, विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय एवं छात्रोपयोगी पुस्तक तथा क्रीड़ा का सामान नदारद है। यहां पहली से 10 वें वर्गों की पढ़ाई होती है। जिसमें कुल 150 नामांकित छात्र है। शिक्षकों के स्वीकृत 7 में 2 पद लिपिक और आदेशपाल का पद रिक्त है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय भवन के जर्जर होने एवं सरकारी सुविधा नहीं मिलने से बच्चों को विद्यालय भेजना सम्भव नहीं है।
*सरकारी लाभ से वंचित हें बच्चे*
विद्यालय के बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। हालांकि पहले साइकिल योजना का लाभ मिल रहा था, लेकिन अज्ञात कारण से यह बंद हो गया। बच्चों को पोशाक व छात्रवृत्ति आदि का लाभ भी नहीं मिलता है। मध्याह्न भोजन योजना के लाभ से वंचित हें बच्चे। विद्यालय में सह शिक्षा है लेकिन यूरीनल एवं शौचालय की कमी है। उसकी सफाई के लिए कोई सरकारी सुविधा नहीं है।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक रतीश कुमार झा एवं भूमि दात के पौत्र सह सहायक शिक्षक अजीत कुमार ने बताया कि भवन व अन्य सुविधाओं के अभाव में बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को अध्यापन कार्य में कठिनाई हो रही है। उन्होंने कहा कि विभाग को इसकी जानकारी है।



