बाल कला जत्था नोनपुर का 27वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया
आर एम न्यूज़ मीडिया संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
तेघड़ा/ बेगूसराय
बाल कला जत्था नोनपुर ने 27 वां स्थापना दिवस चांद सूरज पुस्तकालय नोनपुर के सभा भवन में हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के पूर्व सचिव रामाकांत ठाकुर, पूर्व अध्यक्ष उपेंद्र शाह और सदस्य राजकिशोर सिंह द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। दीप जलाने के बाद, संस्था के पदाधिकारियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुए बाल कला जत्था की 26 साल की लंबी यात्रा पर प्रकाश डाला और संस्था की उपलब्धियों को साझा किया।
संस्था ने पिछले 26 वर्षों में ग्रामीण बच्चों के साथ लगातार गीत-संगीत और नाटक के माध्यम से सांस्कृतिक प्रशिक्षण दिया है। इन वर्षों में बाल कला जत्था ने न केवल कला और संस्कृति के संरक्षण का कार्य किया है, बल्कि इसके द्वारा आयोजित नाटकों ने समाज में जागरूकता फैलाने और जन कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संस्था का यह उद्देश्य है कि नाटक, गीत-संगीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को न केवल कला की बारीकियों से परिचित कराना, बल्कि उन्हें समाजिक जिम्मेदारियों का भी एहसास कराना।
इस खास मौके पर "जंगल का बुलावा" नामक बाल नाटक का मंचन किया गया, जिसे सिकंदर कुमार ने लिखा और राजीव कुमार ने निर्देशित किया। नाटक में शहरी जीवन, ग्रामीण जीवन, और जंगल के बीच के संबंधों को बेहद सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया। नाटक ने यह संदेश दिया कि जंगल और प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। नाटक के पात्रों के माध्यम से यह दिखाया गया कि कैसे जंगल और ग्रामीण जीवन का तालमेल शहरी जीवन की बेहतर समझ में मदद कर सकता है और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को भी उजागर किया गया।
इस नाटक में प्रकाश व्यवस्था का जिम्मा सुधीर कुमार और मनीकांत कुमार ने संभाला, जिनकी मेहनत से कम संसाधनों में भी दृश्य प्रभावशाली बना। दृश्य के अनुरूप प्रकाश संयोजन किया गया, जो नाटक के भावनात्मक प्रभाव को और गहरा कर गया। संगीत का संयोजन अमरेश और दीपक कुमार ने किया, जो नाटक के मूड के अनुसार एकदम सही था। वस्त्र विन्यास का कार्य शत्रुधन शर्मा ने किया, जबकि रूप सज्जा का जिम्मा विकास कुमार, भागवत और अवनीश कुमार ने बखूबी निभाया।
नाटक के पोस्टर डिज़ाइन का कार्य सुजीत कुमार ने किया। यह पोस्टर नाटक के विषय और उसके संदेश को अत्यंत प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करता था। मंच पर अभिनय करने वाले बच्चों ने भी अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। इनमें शिवम् कुमार, अमन कुमार, आयुष, हिमांशु, अभिषेक, देवराज, अंकित, गोपाल, सिंधु, और आदित्य राज शामिल थे।
इस कार्यक्रम के माध्यम से बाल कला जत्था नोनपुर ने अपने 27 वर्षों की यात्रा को एक नई दिशा दी है और यह साबित किया कि कला और संस्कृति न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि यह समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को भी व्यक्त करता है। कार्यक्रम के आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि कला के माध्यम से किसी भी समाज में जागरूकता और परिवर्तन लाया जा सकता है।








