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Sach Aaj Tak जयंती पखवाड़ा के तहत भिखारी ठाकुर की मनाई गयी 137वीं जयन्ती

 जयंती पखवाड़ा के तहत भिखारी ठाकुर की  मनाई गयी 137वीं जयन्ती


आर एम न्यूज़ मीडिया संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट 

   कलाकार की वजह से भोजपुरी भाषा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।भिखारी ठाकुर की 137वीं जयंती पखवाड़ा 

  सारण जिले के दियारा इलाका स्थित कुतुबपुर गांव में जन्मे भिखारी ठाकुर संघर्ष की उपज थे।

  भिखारी ठाकुर हासिए पर खड़े लोगों की आवाज थे। भिखारी ठाकुर इनका जन्म 1887 ई को छपरा बिहार में हुआ था। वे पहले नाई का काम करते थे। वे रोजी-रोटी है तलाश में खड़कपुर गए। वहां उन्होंने रामलीला मंचन देकर घर लौटे तो कला का प्रतिउनकी रुचि जगी और स्वयं रामलीला मंजन करने लगे। 1917 में अपनी नाच मंडली का गठन किया। लोक नृत्य के माध्यम से वे समाज में व्याप्त कुरितयों पर भी वार किया करते थे। विदेशिया, बेटी- बेचवा उनकी उल्लेखनीय रचना है। राष्ट्रीय नाई महासभा बेगूसराय के द्वारा बेगूसराय के रामसखी मध्य विद्यालय परिसर में शनिवार को भोजपुरी के जनक एवम् भोजपुरी के शेक्सपियर दादा भीखारी ठाकुर जी की 137वीं जयंती पखवाड़ा गई। इस जयंती समारोह की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष प्रोफेसर रविंद्र कुमार पप्पू ने किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय नाई महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रोफेसर श्रीकांत ठाकुर, जिला सचिव प्रभु प्रताप ठाकुर, पूर्व जिला अध्यक्ष राम अवतार ठाकुर, निदेशक मंडल रामदास ठाकुर, रामचरित्र ठाकुर, जिला उपाध्यक्ष बैजनाथ ठाकुर, रामकुमार ठाकुर, सरस्वतीचंद्र ठाकुर,दिलीप ठाकुर आदि ने उनके तैल्य चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया। प्रदेश उपाध्यक्ष प्रोफेसर श्रीकांत ठाकुर ने कहा कि भिखारी ठाकुर एक बहु आयामी प्रतिभा के व्यक्ति थे। इन्होंने भोजपुरी को अपना मातृभाषा बना देश व विदेश में ख्याति दिलाने का काम किया। वही  जिला अध्यक्ष प्रोफेसर रविंद्र कुमार पप्पू ने कहा कि आज पूरे देश को भिखारी ठाकुर जैसे महान लोक  कलाकार पर गर्व है उन्होंने भिखारी ठाकुर के जन्माष्टमी को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ने की बात कही। वहीं जिला सचिव प्रभु प्रताप ठाकुर ने भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व कृतित्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। वही कार्यक्रम के मौके पर नई जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने के साथ ही 5 जनवरी को राष्ट्रीय नाई महासभा के 21वें स्थापना दिवस पर पटना में प्रस्तावित विशाल रैली में बेगूसराय से अधिक से अधिक प्रतिनिधि को शामिल करने का निर्णय लिया गया।

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