साक्षात स्वरूप है श्रीमद् भागवत कथा सुनने मात्र से होता है कल्याण
तेघड़ा से आर एम न्यूज़ मीडिया संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
शनिवार को सिद्धाश्रम सिमरिया धाम में कथा ज्ञान मंच से पूज्य गुरुदेव व्यास पीठ से अपने उद्बोधन में बताया कि श्रेष्ठ व्यक्ति अपने वर्तमान को भूलता नहीं कथा सुनने से मन की व्यथा दूर होती है ।कहा गया है कि यज्ञ के पांच अंग हें। जपात्मक, हवनात्मक,पठात्मक, अन्नातमक, ज्ञानात्मक ये सभी यज्ञ के मुख्य अंग कहलाते हें। इन पांचों के बिना यज्ञ बेकार है,अहंकार के भी तीन भेद होते हें। राजसी, तामसी, सात्विक । जब साथ की अहंकार रहेगा तभी आप पूर्णता को प्राप्त कर सकते हें धर्म करने के तीन चरण है साधक सुजान, सिद्धि , कहा गया है कि जो भगवान के भक्त होते हें ।जो भगवान को अर्पित करते हें ।जिसने अपने धर्म की रक्षा की है धर्म उसकी रक्षा करता है, संसार का निर्माण पांच तंत्र से हुआ है, गुण और कर्म से चार वर्ण हुए जो कोई भी सपा पंचतंत्र से कम करता है उसको किसी प्रकार की कमी नहीं रहती है ज्ञान का अंतर ही विभाजन का मूल कारण होता है ।भक्ति के पहले श्रद्धा होनी चाहिए तभी विश्वास जागेगा भक्ति में जो नियम का पालन करता है वही पूर्णता को प्राप्त करता है जो कमी क्रोधी ,लोभी है ,पापी है उनका पुण्य करने पर भी चिन्ह् हो जाता है आप चाहे निष्काम भक्ति से पुण्य करें या सकाम भक्ति से करें कहा गया है कि तीन सजावट देश को सती संत और सूर, तीन लजावट देश को कपटी कायर क्रूर । इसी प्रकार से बताया गया है कि देवता वह कहलाते हें जो संसार को मानते हें। और मानव वह कहलाते हें। जो धर्म को मानते हें। और दानव का गुण वह होता है जो ना धर्म को मानते हें ना कर्म को मानते हें ना संसार को मानते हें जो अपने सुख में सुखी रहना चाहते हें क्या ऐसा पुत्र किसी मां-बाप को सुख दे सकता है क्या पुत्र दुराचारी हो तो मां-बाप सुखी रह सकते हें । इसीलिए सबको सत्कर्म के रास्ते पर ही आगे बढ़ना चाहिए। मौके पर ब्रह्मचारी रविंद्र जी महाराज, मीडिया प्रभारी नीलमणि सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे


