बेगुसराय जिला अन्तर्गत बरौनी प्रखंड के सिमरिया धाम स्थित विश्व कबीर दिव्य ज्योति धर्म सेवा संस्थान के प्रधान कार्यालय सह मठ में बिहार सरकार के अनु० जाति/अनु० जनजाति कल्याण मंत्री सह कबीर पंथी माननीय रत्नेश सदा तथा फतुहा, पटना कबीर मठ के मठाधीश आचार्य महंथ ब्रजेश मुनि पधारे।
दोनों महापुरुषों ने संध्या वंदन किया। मुख्य अतिथि मंत्री श्री सदा ने संबोधित करते हुए कहा कि ब्रह्मांड में जितने भी देवी, देवता, गुरु, सदगुरु, जगतगुरु आदि ने क्रोध नहीं करने का उपदेश दिया लेकिन स्वयं जीवन में कम-से-कम एक बार क्रोध ज़रूर किया लेकिन सदगुरु कबीर बावन तरह के कष्ट भोगने के बाद भी एक बार भी क्रोध का वरण नहीं किया।
आचार्य महंथ ब्रजेश मुनि ने अपने प्रवचन में संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वैसे गुरु या सदगुरु का शिष्य बनना चाहिए जिनके कथनी-करनी में समानता हो अर्थात सद्गुरु कबीर साहब ही ऐसे सदगुरु हुए जिनकी कथनी और करनी में समानता है। विश्व कबीर दिव्य ज्योति धर्म सेवा संस्थान के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य महंथ धर्म दास साहब, अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डा० राजकुमार आजाद, अंतर्राष्ट्रीय प्रधान महासचिव डा० सुधीर पासवान, नेपाल के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंथ हनुमान दास आदि ने दोनों मुख्य अतिथियों को पुष्पों की माला पहनाकर तथा चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया। साध्वी जानकी दासीन ने मुख्य अतिथियों के सम्मान में स्वागत गीत गाकर अध्यात्मिक माहौल उत्पन्न कर दिया।
सभी अतिथियों को प्रसाद ग्रहण करवाकर नम आंखों से विदाई दी गई। अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डा० राजकुमार आजाद ने संबोधित करते हुए कहा कि ब्राह्म्णवादियों ने ईंट, पत्थर, लकड़ी, कुत्ता, मछली, चींटी,सांप आदि सभी में भगवान दर्शन करना दिया सिवाय मनुष्य के। संसार में मात्र कबीर पंथ ही ऐसा पंथ है जिसमें मनुष्य में ही भगवान का दर्शन किया जाता है। खासकर अतिथियों को तो भगवान से ऊपर रखा जाता है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को उस धर्म या पंथ को अपनाना चाहिए जिससे मनुष्य को ही भगवान समझा जाता है, कोई बड़ा या छोटा , कोई छूत अछूत का भेद भाव नहीं हो।







