आंगनबाड़ी सेविकाओं की हड़ताल से 11680 बच्चे पठन-पाठन व पोषाहार से वंचित।
29 सितंबर से हड़ताल पर है आंगनबाड़ी सेविका - सहायिका
प्रखंड अंतर्गत कल 307 आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने से सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर ग्रहण लग गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हड़ताल का एक माह 7 दिन होने जा रहा है लेकिन अब तक सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लंबे हड़ताल पर चले जाने से 11680 बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो गया है। वही बच्चों को मिलने वाली पोषण और 4672 गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को मिलने वाली खाद्य सामग्री भी भी बंद है। जिसका खामियाजा बड़े पैमाने पर बच्चों और गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ता नजर आ रहा है। सेविकाओं के हड़ताल पर रहने से लंबे समय से आंगनबाड़ी केंद्र बंद है । जिसके कारण 3 वर्ष से 6 वर्ष के बच्चों का पठन-पाठन भी बंद हो गया है। प्रखंड में कुल 307 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। जिसमें 30 मिनी आंगनवाड़ी केंद्र शामिल है। 277 आंगनबाड़ी केंद्र में प्रत्येक केंद्र पर 40 बच्चे एवं 8 धात्री एवं 8 गर्भवती महिलाएं वही 30 मिनी आंगनवाड़ी केंद्र में प्रत्येक केंद्र पर 20 बच्चे और चार गर्भवती एवं चार धात्री महिलाओं को इस महत्वाकांक्षी योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। अनिश्चितकालीन हड़ताल से सरकार द्वारा संचालित कई महत्वपूर्ण योजनाएं भी प्रभावित होता दिख रहा है। केंद्र की ओर रुख करने वाले नोनिहालों के चेहरे पर मायूसी देखी जा रही है। यहां तक की टीकाकरण, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, निर्वाचन आयोग का मतदाता संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्य पर भी अब प्रभाव पड़ने लगा है । 29 सितंबर सेलगातार हड़ताल और विभिन्न जगहों पर हो रहे प्रदर्शन के मामले में तूल पकड़ लिया है। बताया जाता है कि कई सामाजिक संगठन अब आंगनबाड़ी कर्मियों के समर्थन में आ गए हें। नाम न छापने के शर्त पर एक आंगनबाड़ी कर्मी बताती है कि वर्तमान परिपेक्ष में आंगनबाड़ी कर्मियों के कंधे पर विभागीय कार्यों के अलावा महंगाई का भी बोझ है।जिससे हल्का करने में सरकार विफल साबित हो रही है। इससे आंगनबाड़ी कर्मियों का शोषण हो रहा है यदि इस प्रदर्शन से सरकार हमारी मांग को अनसुना करेगी तो यूनियन के बैनर तले राज्यव्यापी प्रदर्शन की जाएगी। विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्र संचालक को लेकर किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।












