अष्टमी के दिन महागौरी की पूजा,भक्तों की भीड़
प्रखण्ड क्षेत्र अन्तर्गत नावकोठी और समसा में मां महागौरी की श्रृद्धा और विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना की गयी।बुधवार चैत्र शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आठवीं शक्ति यानि महागौरी की पूजा अर्चना की गयी।इनका रंग पूर्णतः गोरा होने के कारण इन्हें महागौरी या श्वेताम्बरधरा भी कहा जाता है।इनके रंग की उपमा शंख,चन्द्र देव और कन्द के फूल से की जाती है।मां शैलपुत्री की तरह वाहन बैल होने के कारण इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।इनका ऊपरी दाहिना हाथ अभय मुद्रा में,निचले हाथ में त्रिशूल, ऊपर वाले बांये हाथ में डमरू जबकि नीचे वाला हाथ शान्त मुद्रा में है।मां का प्रिय फूल रात रानी है। भक्तों ने मां के आगे दीप, फल,फूल,प्रसाद का अर्पण किया।इस अवसर पर महाअष्टमी के दिन देवी दुर्गा के महागौरी के निमित्त उपवास किया गया।धर्मशास्त्र के अनुसार इससे देवी मां बहुत प्रसन्न होती हैं और मन की सारी मुरादें पूरी करती हैं।भक्तों ने मां का प्रिय मंत्र "सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोsस्तुते" का पाठ कर अन्न,धन, अमन चैन और सुख समृद्धि की कामना की।







