बिहार व देश के लिए जाति आधारित गणना से ही वंचितों का विकास संभव----शिवचंद्र
जिला परिषद क्षेत्र संख्या 18 के जिला पार्षद सदस्य सह जदयू नेता शिव चंद्र महतो ने बिहार में चलाए जा रहे जातिगत गणना को तर्क संगत सही ठहराते हुए कहा कि एक व्यक्ति की सामाजिक ,आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति व प्रगति में उनकी जाति का असर कमोबेश देखी जा रही है जिसे नकारा नहीं जा सकता है। जिसे जाति के आधार पर पिछड़ेपन का निदान जाति के आंकड़े जुटाकर ही उस क्षेत्र में वैसे लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की योजना तैयार की जा सकती है । जिसके लिए जाति गणना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान भी जाति आधारित जनगणना कराने के पक्षधर हें जिसके तहत अनुच्छेद 340 में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की दशा को सुधारने के लिए आयोग की नियुक्ति का प्रावधान निहित है।उन्होंने कहा कि जाति हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में एक प्रमुख भूमिका निभाती है । फिर भी इससे संबंधित कोई विश्वसनीय और व्यापक जातिगत आंकड़े सरकार के पास मौजूद नहीं है । यह सबका साथ सबका विकास के लक्ष्य को हासिल करने के प्रति चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी बार-बार सरकार से जातीयों
से संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है। जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता वास्तव में वंचित लोगों की संख्या उनके व्यवसाय का रूप उनकी वास्तविक दशा को सामने लाएगी। उन्होंने लोगों से नए बिहार के बदलते स्वरूप के हिस्सेदार बनते हुए जाति गणना में लगे कर्मियों को सहयोग देने की अपील की।


