आई फाइनेंस की मनमानी समय से पहले किस्त जमा होने के बावजूद खातों से जबरन पैसे काटने और धमकी देने से उपभोक्ता त्रस्त, प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
सुभाष चौक (हरख) में आई फाइनेंस का आतंक: तय तारीख से हफ्तेभर पहले खाताधारकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे अधिकारी
बेगूसराय में प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों की तानाशाही चरम पर: किस्त चुकाने के बाद भी खातों से पैसे काटने पर फूटा लोगों का गुस्सा
आई फाइनेंस की मनमानी और मानसिक उत्पीड़न से उपभोक्ता परेशान, समय से पहले किस्त जमा करने के बावजूद खातों से जबरन पैसे काटने Subhash chowk(Harakh)
Pushpa place begusarai
Bihar 851101
और मामला आया सामने
बेगूसराय, बिहार
जिले में वित्तिय संस्थानों और फाइनेंस कंपनियों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला 'आय फाइनेंस' (Aye Finance Limited) से जुड़ा है, जहां एक उपभोक्ता को कंपनी के अधिकारियों द्वारा गंभीर मानसिक प्रताड़ना, अवैध रूप से पैसे काटने और जाने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित उपभोक्ता ने इस तानाशाही रवैये के खिलाफ प्रशासन से त्वरित और सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित उपभोक्ता राम आधार सहनी (निवासी बेगूसराय, बिहार) ने आय फाइनेंस लिमिटेड से बिजनेस लोन (लोन संख्या: 4160005295) लिया हुआ है। लोन के नियमों के अनुसार किस्त जमा करने की निर्धारित तिथि हर महीने की 3 तारीख है।
उपभोक्ता का आरोप है कि वह नियत तिथि से पहले ही ऑनलाइन माध्यम से हर महीने की किस्त का भुगतान पूरी ईमानदारी से कर देता है और उसके सभी ऑनलाइन भुगतान की पुख्ता रसीदें भी उसके पास मौजूद हैं। इसके बावजूद, पिछले चार महीनों से आय फाइनेंस कंपनी द्वारा उनके बैंक खाते से जबरन और दोहरे तरीके से पैसे काटे जा रहे हैं।
समय से पहले शुरू हो जाती है मानसिक प्रताड़ना और धमकियां
पीड़ित ने बताया कि किस्त चुकाने की तय तारीख 3 तारीख होने के बावजूद, फाइनेंस कंपनी के नुमाइंदे हर महीने की 23 तारीख से ही उपभोक्ता को फोन कर मानसिक रूप से टॉर्चर करना और पैसे चुकाने के लिए डराना-धमकाना शुरू कर देते हैं। तय समय से 7-10 दिन पहले ही जबरन और अवैध तरीके से दबाव बनाकर किस्त वसूली जा रही है और ऊपर से बैंक खाते से भी पैसे काट लिए जा रहे हैं।
कंपनी की इस तानाशाही कार्यशैली से उपभोक्ता मानसिक रूप से काफी परेशान और हताश हो चुका है। कंपनी की ओर से उपभोक्ता का जीना मुहाल हो गया है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
वित्तीय कंपनियों द्वारा इस प्रकार के अवैध हथकंडों और उपभोक्ताओं के उत्पीड़न से आम जनता में भारी रोष व्याप्त है। पीड़ित उपभोक्ता और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने जिला प्रशासन और संबंधित नियामक अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया जाए। आय फाइनेंस कंपनी की इस मनमानी, अवैध कटौती और मानसिक उत्पीड़न की उच्चस्तरीय जांच कराकर कंपनी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि आम उपभोक्ताओं को ऐसी शोषणकारी प्रथाओं से राहत मिल सके।






