शराबबंदी के बिहार में बेगूसराय बना 'मैदान-ए-मैख़ाना': खाकी की चुप्पी और उत्पाद विभाग की सरपरस्ती में धड़ल्ले से चल रहा मौत का कारोबार, आखिर किसकी शह पर फल-फूल रहे हैं सिंडिकेट?
अखबारों के पन्नों पर चीखती हैं खबरें, मगर प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती खुलेआम घूम रहे माफिया, सहमी जनता पूछ रही—'क्या बिक चुका है कानून।
बेगूसराय में प्रशासनिक सुस्ती उत्पाद विभाग की बेफिक्री से फल-फूल रहा शराब माफियाओं का अवैध कारोबार, जिले में सहम गया माहौल।
बरौनी/ बेगूसराय वरिष्ठ संवाददाता महंत राम जीवन दास
बेगूसराय बिहार में पूर्ण शराबबंदी के दावों की पोल जिले में सरेआम खुलती नजर आ रही है। एक तरफ जहाँ लगातार मीडिया और अखबारों में शराब के अवैध कारोबार को लेकर खबरें प्रमुखता से प्रकाशित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर बेगूसराय उत्पाद विभाग और जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। आलम यह है कि प्रशासनिक खामोशी और सुस्ती के चलते शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उनका धंधा दिन-रात फल-फूल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के शहरी इलाकों से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक शराब की होम डिलीवरी धड़ल्ले से हो रही है। इस अवैध और बेखौफ कारोबार के कारण पूरे जिले में अपराधियों और शराब तस्करों का आतंक धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
कई इलाकों में तो शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है, जिससे महिलाओं और बच्चों का घर से निकलना भी दुर्लभ हो गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स और लगातार आ रही शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक अमले का 'हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना' कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या उत्पाद विभाग और स्थानीय प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है? या फिर इस मिलीभगत के खेल में कानून के रखवाले ही मूकदर्शक बने हुए हैं?
जिले के प्रबुद्ध नागरिकों और आम जनता ने एक बार फिर से जिला प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से कड़ा रुख अपनाने की मांग की है। लोगों की मांग है कि तत्काल प्रभाव से विशेष छापेमारी अभियान चलाकर इन शराब माफियाओं के नेटवर्क को नेस्तनाबूद किया जाए और लापरवाह अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो, ताकि बेगूसराय को अपराध और नशे के इस आतंक से मुक्त कराया जा सके।




