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Sach Aaj Tak News बीत रहा घोर कलयुग में केवल राम नाम ही सहारा है। -आचार्य वेदानन्द शास्त्री।

बीत रहा घोर कलयुग में केवल राम नाम ही सहारा है। -आचार्य वेदानन्द शास्त्री।


बरौनी/बेगूसराय/सच आज तक न्यू संवाददाता महंत राम जीवन दास की रिपोर्ट


राधाकृष्ण भक्त मंडल समिति गरहारा द्वारा आयोजित एक दिवसीय श्री राम कथा सत्संग समारोह मेंआचार्य श्री वेदानंद शास्त्री आनंद जी ने  भरत के निश्छल प्रेम का स्मरण कराते हुए कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वन में भगवान श्री राम की दिनचर्या साधारण मानव की तरह व्यतीत हो रही थी। अपने पिता को दिया हुआ वचन तो बस एक संयोग था,जबकि वे दुष्टों का संहार करने के लिये वन में जाना स्वतः स्वीकार किये थे। प्रभुश्रीराम लक्ष्मण जी इहलौकिक व्यवहार एवं माया के बारे में बताये। भगवान की प्रेरणा से शूर्पणखा का प्रवेश उनके कुटिया में होती है और संवाद होते- होते उसकी कान नाक को लक्ष्मण जी काटते है। और प्रभु की लीला का प्रारंभ होता है। प्रकरण के अनुसार मारीच का सोने का मृग बनना ,उनका भगवान के हाथो उद्धार होना ,रावण के द्वारा श्रीसीताजी का हरण, जटायु का रावण से युद्व ओर उनका प्रभु के द्वारा सदगति देना विस्तार से बताये। इसी बीच इंद्र के पुत्र जयंत  ने एक कौवा का रूप लेकर श्री जानकी जी के सुंदरता से मोहित होकर उनके चरण पे चोंच मारकर भागा, परंतु श्री भगवान के अलावा उसे कहीं शरणागति नही मिली। उन्होंने कहा की जब तक आत्मिक संतोष न हो जाये तब तक आप कितने भी ऐश्वर्यवान हो जाये यथा इंद्र के स्वर्ग जैसा सुख और भोग विलास की तुलना सात्विक उत्कृष्ट  सुखों से नही हो सकती, फिर भी उद्विग्न मन से उन्होंने ऐसा दुर्व्यवहार कर दिये। दूसरी ओर भगवान की प्रतीक्षा में शबरी के बिताये जीवन और विश्वास की पराकाष्ठा का भी वर्णन किये। इस संसार में माता- पिता एवं गुरु की भूमिका जीवणोद्धार के लिए परम आवश्यक है। गुरु के वचन को पूर्ण निष्ठा से मानने से इहलौकिक एंव पारलौकिक सभी सुख प्राप्त हो जाते है। अपने इन्द्रियों का संयम एवं प्रभु की भक्ति से मानव सभी प्रकार के कल्मषों से मुक्त हो जाता है।  श्री भगवान ने शबरी के प्रेम एवं उत्कृष्ट दर्शन के अभिलाषी को प्रमाणिक करते हुए नवधा भक्ति का ज्ञान दिये, और मोक्ष प्रदान कराते हुए सदगति दी। भक्ति के लिये न ही उम्र ,न ही जाति और न ही रंगभेद होता है। हरि को भजे सो हरि  के होई। मौके पर राधाकृष्ण भक्त मंडल के संयोजक जीवानन्द मिश्रा, अध्यक्ष नेहा अमर,सचिव खुशबू सिन्हा, बन्दना मिश्रा, गुड़िया प्रकाश,कोषाध्यक्ष शशिकांत, पंकज कुमार राकेश,अभय कुमार,मनीष कुमार,ज्ञानप्रकाश,पिंस कुमार,चंदन कुमार,मनोज कुमार,के अलावे दर्जनों सदस्य उपस्थित थे।.

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