जगह-जगह पर विश्वकर्मा बाबा मूर्ति का विसर्जन किया गया
बीहट बेगूसराय सच आज तक न्यूज़ संवाददाता मुकेश कुमार की रिपोर्ट
विश्वकर्मा पूजा भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है, जिन्हें सृष्टि का निर्माता और देवताओं का वास्तुकार माना जाता है। यह पूजा हर साल 17 सितंबर को मनाई जाती है, क्योंकि इस दिन सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है, जिसे कन्या संक्रांति कहा जाता है।विश्वकर्मा पूजा का महत्वः
देवताओं के शिल्पकारः भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार और आदि अभियंता माना जाता है, जिन्होंने द्वारिका नगरी, पांडवों की माया सभा और कई दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था।
तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में महत्वः यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करते हैं, जैसे इंजीनियर, मैकेनिक, कारीगर, श्रमिक और वेल्डर।
कार्य में सफलता और सुरक्षाः इस दिन
लोग अपने औजारों, मशीनों और कार्यस्थल की पूजा करते हैं और अच्छे भविष्य, कार्य में सफलता और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं।
विश्वकर्मा पूजा की तिथि और समयः
तिथि: 17 सितंबर 2025
शुभ मुहूर्तः 17 सितंबर को 01:55 अपराह्न से शुरू होगा विश्वकर्मा पूजा विभिन्न क्षेत्रों में मनाया गया एवं 18 तारीख को बाबा विश्वकर्मा मूर्ति को गंगा जी में विसर्जन किया गया


