तीनों वेदों के अनुसार रक्षाबंधन श्रावणी पूर्णिमा, भाई बहन की अटूट प्रेम की कहानी।
बहन भाई को रेशम का धागा बांधकर अपनी रक्षा की संकल्प दोहराती है।
बरौनी/बेगूसराय/ सच आज तक न्यूज़ संवाददाता महंत रामजीवन दास की रिपोर्ट ।
श्रावणी पूर्णिमा, रक्षाबंधन, श्रावणी उपाकर्म, ऋग्वेद अजूवेद, अर्थववेद, उपक्रम, पुर्णिमांत श्रावण मास, चतुर मांस के दिनों में तांबे वह कैसे के पत्रों का उपयोग नौकर के अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।
पलाश के पत्तों की पटल पर भोजन करना पाप नाशक है।
रक्षाबंधन के दिन महालक्ष्मी मंदिर में या घर पर ही देवी लक्ष्मी का पूजन कर दूध, चावल, केला, व पंचमेवा से बनी खीर देवी को अर्पण कर कन्या और बालकों को प्रसाद बांटना चाहिए। रक्षाबंधन के दिन हनुमान जी को चोला चढ़कर गुड का भोग लगे व गुलाब के फूल चढ़ाएं, हर समस्या का समाधान हो जाएगा।
कोई भी ऐसा पौधा जो प्रति वृक्ष के नीचे उगा हुआ हो, राखी के दिन उसे अपने घर के किसी गमले में लाकर लगा ले ऐसा करने से दरिद्रता दूर होती है और घर में अस्थाई लक्ष्मी का निवास होता है।
अगर आप अपार धन समृद्धि चाहते हैं तो रक्षाबंधन के दिन लाल रंग की मिट्टी के घड़े में नारियल रखकर,उस पर लाल कपड़ा ढक कर झोली बांधकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।
सरसों के तेल में सिके गेहूं के आंटे व पुराने गुड़ से तैयार साथ पुए, सात मदार -आक के फूल, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों का तेल का दीपक, पत्थर या अरंडी के पत्ते पर रखकर रक्षाबंधन की रात में किसी चौराहे पर रख दें और कहे-हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यही छोड़ कर जा रहा हूं कृपा करके मेरा पीछा ना करना।
रक्षाबंधन के दिन गणेश जी के चित्र के सामने लॉन्ग व सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो इस लौंग और सुपारी को साथ लेकर जाएं, तो काम सिद्ध होगा।
रक्षाबंधन का मंत्र
**वैदिक पंचांग**
येन बद्धो बलिराजा*
*दानवेन्द्रो महाबल : l*
*तेन त्वामपि बध्नामि*
*रक्षे मा चल मा चल l
रक्षा सूत्र बांधते हुए बहन कहती है-महान शक्तिशाली दानवेंद्र राजा बलि को जिस रक्षा-सूत्र से बांधा गया था, इस सूत्र से मैं तुझे बांधता हूं।-हे रक्षे-राखी । तुम अधिक रहना, अर्थात तुम अपनी रक्षा संकल्प से कभी भी विचलित न होना।
रक्षाबंधन भाई बहन की अटूट प्रेम की कहानी है जिसे बहन द्वारा रंग बिरंगी राखी लाकर अपने भाई के कलाई पर बांधकर उनसे अपनी रक्षा की गुहार लगाती है। इस पर्व में हर घरों में बहाने अपने भाई के कलाई पर राखी बांधने के लिए दूर-ड्रा से भी आकर राखी बनती है इतना ही नहीं जिनके भाई घरों से दूर रहते हैं उन्हें भी रजिस्ट्री के द्वारा राखी भेज कर उनसे अपने प्रेम की कथा सुनाती है । और अपने भाई से जीवन भर रक्षा की गुहार लगाती है।
रक्षाबंधन का त्यौहार बहनों द्वारा बड़े ही धूमधाम से भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी कलाई पर राखी बांधती है और भाई भी उन्हें अपने ओर से रक्षा की संकल्प लेकर उन्हें कुछ न कुछ गिफ्ट करती है।
**रक्षाबंधन हिंदू धर्म मे बहनों का महत्वपूर्ण त्यौहार है।**
**भाई बहन की अटूट प्रेम की कहानी।**
रक्षाबंधन जिसे हम हिंदुओं के बहनों के लिए सबसे महा पर्व मानते आए हैं। ,आज के दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में रक्षा सूत्र बांध कर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, और अपनी रक्षा की गारंटी मांगती आई है।जबकि भाई अपनी बहन को कुछ उपहार देते हैं ।ओ बहन के लिए सबसे बड़ा प्यार होता है ।राखी बांधने से पहले बहन अपने भाइयों की माथे पर तिलक लगाती है, उसके बाद बहन फिर रेशम का सूत हाथ पर बांध कर आरती उतारती है , और फिर भाई का मुंह मीठा करती है, फिर एक दूसरे से आशीर्वाद लेते हुए सदैव रक्षा करने का वचन लेती हैं ।
जबकि रक्षाबंधन में सबसे पहले बांधने बाली, देवी माता लक्ष्मी ने पैराणीक कथा के अनुसार राजा बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बनाई थी।
महत्वपूर्ण कथा के अनुसार, देवी यमुना जी अपने भाई यम को राखी बांधकर उन्हें अमरत्व होने का वरदान दिए थे ।
गीता की कथाएं में बांधे गए बंधन देवी द्रौपदी ने भगवान श्री कृष्ण को राखी बांधकर उन्हें अपनी रक्षा करने वो उनसे रक्षा की प्रार्थनाकी है। हे कृष्ण आप हमें सदा ही रक्षा करने का वचन दे ।उन्होंने उपहार सम्मान के तौर पर वचन दिए कि, रक्षा सूत्र का सम्मान करते हुए हमेशा रक्षा के लिए तत्पर रहूंगा।रक्षा का अर्थ है कि कृष्ण का वचन ही हर बहनों ने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर भाई के लंबी उम्र की कामना करती आई है।







