सांस्कृतिक विकास की धारा में सिंदूर का व्यापक महत्व है:डॉ संजय झा। सिंदूर के महत्व पर त्रिदिवसीय संगोष्ठी आयोजित।
बीहट। संवाददाता यदुनंदन कुमार
सिद्धाश्रम सिमरियाधाम के प्रांगण में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को स्वामी चिदात्मन जी महाराज के पावन उपस्थित में आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी(विषयक सनातन संस्कृति में सिन्दूर का महत्व) के प्रथम दिवस के उद्घाटन सत्र में डा संजय झा,डॉ संजीत कुमार झा, मिथिलाविश्वविद्यालय,डॉ नागेंद्र शर्मा पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, डॉ अवधेश कुमार झा,अरुण मालपुरी, तथा रविन्द्र ब्रह्मचारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।इससे पूर्व सर्वमंगला परिवार के द्वारा आगत अतिथियों का मिथिला परंपरा के अनुसार अंग वस्त्र पुष्प गुच्छ एवं पाग भेंट कर सम्मानित किया गया।तत्पश्चात् शोध छात्र अभिजीत कुमार के द्वारा स्वस्तिवाचन किया गया।समारोह में उद्घाटन के उपरांत उद्बोधन देते हुए मुख्य अतिथि डॉक्टर संजय झा ने कहा सांस्कृतिक विकास की धारा में सनातन संस्कृति और संस्कार में सिंदूर का बहुत अधिक महत्व है। सिंदूर अनंत और असीमित शक्ति को प्रदर्शित करने तथा निरंतरता का द्योतक है। वहीं डॉ संजीत कुमार झा ने कहा भारतीय संस्कृति एवं संस्कार अनादि एवं सनातन स्वरूप में हमेशा से ही विश्व को मार्ग दर्शन करता रहा है जिसमे देवी देवताओं के साथ साथ मनुष्य का भी अत्यधिक सम्मान रहा है। उसमें भी नारी एवं नारी के सौभाग्य तत्व सिन्दूर का बहुत बड़ा महत्व है।इसलिए तो कहा गया है शक्ति का बिंब है सिन्दूर, शौर्य का प्रति बिंब है सिन्दूर ,नारी का सतीत्व है सिन्दूर, भारत का अस्तित्व है सिन्दूर, समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ नागेंद्र शर्मा ने कहा कि सिन्दूर शक्ति और संकल्प का प्रतीक है । हमारे संस्कृति का एक विशिष्ट उपलब्धि है।समारोह के सम्मानित अतिथि अरुण मालपुरी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सिन्दूर महिलाओं के संस्कार को सुशोभित करता है।समारोह में सम्मानित अतिथि डॉ अवधेश कुमार झा ने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं संस्कार में सिंदूर भगवान गणेश के समान सर्वकल्याणकारी एवं मांगलिक है। जिसका हम सबों का सम्मान करना चाहिए।संगोष्ठी में शोध छात्रा रूबी कुमारी (मगध विश्वविद्यालय ) ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारा भारतीय संस्कृति अपने आप में अनूठा है ।सिन्दूर संपूर्णता का प्रतीक है।विद्यापीठ के सचिव दिनेश सिंह,शिक्षा सचिव डॉ घनश्याम झा,
संस्थान के निदेशक डॉ विजय कुमार झा,सचिव सुधीर चौधरी,मीडिया प्रभारी नीलमणि,सह सचिव प्रो प्रेम झा, उप निदेशक विनय झा,राजीव कुमार,सुशील चौधरी,विजय सिंह,अरविंद चौधरी,गंगा नंद, प्रेम तीर्थ , निपेंद्र सिंह,श्रवण कुमार,गुंजन पांडे,श्याम झा,राम झा, लक्ष्मण झा, पप्पू त्यागी, पप्पू कुमार, अनुपम झा,रजनीश कुमार, महानंद झा,आचार्य नारायण झा,दिनेश झा, राजेश झा,रमेश झा, रंजना कुमारी आदि उपस्थित थे।



