पत्रकारिता में मिशन की जगह प्रोफेशन ने ली : चंद्रभानु ।
बीहट। सच आज तक न्यूज़ संवाददाता यदुनंदन कुमार
पत्रकारिता का भविष्य एवं मीडिया की चुनौतियां विषय पर सेमिनार आयोजित बिहार ने मनाया अपना प्रथम स्थापना दिवस । पहले पत्रकारिता मिशन था और आज प्रोफेशन हो गया है। आज पत्रकारिता के साथ ग्लैमर जुड़ गया है। मिशन में जोखिम होता है। विज्ञापन एक लाचारी है और हकीकत भी। इसी में सत्ता और विपक्ष की भूमिका होती है। ये बातें एलएनएमयू में मानविकी संकाय के अध्यक्ष डॉ. चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने जीडी काॅलेज के दिनकर सभागार में कही। मौका था न्यूजविस्टा बिहार के प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित पत्रकारिता का भविष्य एवं मीडिया की चुनौतियां विषयक सेमिनार का। इससे पहले अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उद्घाटन के पश्चात शिक्षक रंजन झा राष्ट्रीयता का बोधा आधारित गीत प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. कुंदन कुमार ने किया। मंच संचालन प्रवीण प्रियदर्शी और धन्यवाद ज्ञापन हिमांशु शेखर ने किया। सभी अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र और पौधा देकर किया गया।डॉ. चंद्रभानु ने कहा कि सोशल पत्रकारिता क्रेज की तरह है। प्रिंट का अपना महत्व है। मुद्रित पत्रकारिता से भाषा का संस्कार सीखा जाता था। आज की पत्रकारिय भाषा भ्रष्ट हो गई है। भाषा का संकट तीन-चार वर्षों में बढ़ गया है। पत्रकारिता के भविष्य का संकट वर्तमान के संकट से जुड़ा हुआ है। मीडिया को भी सीमित स्वतंत्रा दी जा रही : भगवान प्रसाद सिन्हाचिंतक और आलोचक डॉ. भगवान प्रसाद सिन्हा ने कहा कि सहजानंद ने लिखा है कि सीएम जब पत्रकार की प्रशंसा करे तो समझिए पत्रकारिता का पतन हो रहा है। पत्रकारिता के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए चुनौतियों के रास्ते पर चलना होगा। मीडिया पर खरबपतियों का कब्जा है। खरबपति बनने के लिए चैनलपति होना जरूरी है। अाज सीमित स्वतंत्रता दी जा रही है। पत्रकारिय पेशा एक सैनिक की तरह है। पत्रकार को समाज में एक योद्धा के रूप में खड़ा रहना पड़ता है। पत्रकारिता, युद्ध के मैदान की तरह एक योद्धा के रूप में काम करने जैसा है। पत्रकारों को हर दौर में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है : संतोष सिंह सेमिनार को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह ने कहा कि पत्रकारों को हर दौर में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। दौर किसी का हो चुनौतियां रही हैं। मोदी नहीं होते तो पता ही नहीं चलता कि हमारा देश कितना मरा हुआ है। इमरजेंसी में लोग लड़ रहे थे। अभी उस तरह से लोग नहीं लड़ पा रहे हैं। एजेंडा चलाने का काम पत्रकारिता नहीं है। पर अभी यही हो रहा है। एजेंडा सेट होता है। यह देश के लिए खतरा है। एजेंडा से बचाने में सोशल मीडिया कारगर है। पत्रकार और नेता को जनता के बीच जाना चाहिए। सिस्टम से फाइट करने की जरूरत है। अभी पत्रकारिता का स्वर्णिम काल है। नया बिहार और नया भारत बनाएं।सूचना प्रदूषण से डर लगता है : कुमार सर्वेश कुमार सर्वेश ने कहा कि गोदी मीडिया के विकल्प के रूप में सोशल मीडिया है। पत्रकारिता का भी पक्ष होना चाहिए और वह जनता का पक्ष है। मैं जनता के पक्ष की बात करता हूं। आज सबसे अिधक हमले संविधान पर हो रहे हैं। यह अघोषित आपातकाल का दौर है। इससे लड़ना मुश्किल है। पत्रकारों पर सवाल उठाने वालों से प्रश्न है। पत्रकारों को इतिहास के साथ छेड़छाड़ को डिफेंड करना चाहिए। मीडिया में टीआरपी का खेल चलता है। सूचना प्रदूषण देश को कहां ले जाएगा, इससे डर लगता है। पत्रकारिता का पक्ष जनता का पक्ष होना चाहिए।पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा मिले : रौशन प्रकाश
पटना साइंस कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार ने कहा कि पत्रकारों के समक्ष कई चुनौतियां हैं। पहले मुद्दा आधारित एजेंडा होता था। आज पूंजी का एजेंडा सेट हो रहा है। रौशन प्रकाश ने कहा कि मीडिया में कारपोरेट हावी है। जनता के बीच काम करने वाले पत्रकार खतरों के बीच काम करते हैं। उनको सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। पत्रकार बिरादरी को अधिकारों के लिए एकजुट होना चाहिए।पाठकों को कंटेंट भी चाहिए : सर्वेश कुमार
दरभंगा स्नातक क्षेत्र से विधान पार्षद सर्वेश कुमार ने कहा कि पूरी दुनिया में हर क्षेत्र में काफी उथल पुथल चल रहा है। पत्रकारिता में तकनीकी क्रांति आ चुकी है। प्रिंट मीडिया के समानांतर खड़ा है सोशल मीडिया। तकनीक मीडिया के सामने एक चुनौती है। इसके साथ सामंजस्य बैठाना पड़ेगा। पाठकों को कंटेंट भी चाहिए।
सोशल मीडिया के जमाने में पत्रकारिता बिखराव हुआ : अमरेंद्र अमर।
संवाद सूत्रों की पीड़ा देखकर जिला पत्रकार संघ बनाने की प्रेरणा मिली। पत्रकारिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोशल मीडिया के दौर में पत्रकारिता बड़ा बिखराव हुआ है। राजनीति की शुचिता को याद दिलाने का काम भी पत्रकारिता है। पत्रकारिता की आग को जिंदा रखना है। इसे बुझाने की कोशिश हो रही है। दिनकर की आग को तेज करने की जरूरत है।सरकारी से ज्यादा मीडिया का निजी घराना बदनाम : विनोद कर्ण जिला पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष विनोद कर्ण ने कहा कि सरकारी मीडिया से ज्यादा निजी मीडिया घराना बदनाम है। विज्ञापन के लिए संतुलन बनाना पड़ता है। मीडिया का उज्जवल भविष्य सोशल मीडिया है। मीडिया पर पहरेदारी की जा रही है। दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ रूपेश कुमार ने कहा कि इंटरनेट पर आने वाली सूचना को वैरिफाई करने की जरूरत होती है। चुनौतियों को रोकने के लिए एक साथ आना होगा। अखबारों में हाशिए की आवाज को भी जगह दी जाती है। पत्रकार विजय कुमार ने कहा कि मीडिया को एक पक्ष लेना पड़ता है। मीडिया में डायवर्सिटी होनी चाहिए। सोशल मीडिया, मेन स्ट्रीम मीडिया के सामने चुनौती है। सोशल मीडिया को जनता की ताकत मिली है। सच को सामने लाने का काम किया है। पत्रकारिता को बचाने के लिए सच के साथ खड़ा रहना होगा।हमारी आवाज सुनने के सारे बिंदु बंद हो रहे : रंजन कुमार मध्य विद्यालय बीहट के प्रधानाध्यापक रंजन कुमार ने कहा कि हमारी आवाज सुनने के सारे बिन्दु बंद हो रहे हैं। आवाज सुनने के बिंदुओं को खोलिए, उन दरवाजों को खोलिए, उन खिड़कियों को खोलिए। समाज के अनसंग हीरो को सामने लाइए। विपक्ष सत्ता पर नियंत्रण के लिए होता है। हमारे विपक्ष में आकर्षण हो गया है सत्ता में बैठने का। जनता के बीच चौकीदार के लिए खड़े हाेते थे। सत्ता का आकर्षण इतना बढ़ा है कि सदन में भी हमारी आवाज उठाने को कोई तैयार नहीं है।
कार्यक्रम में इन लोगों की उपस्थिति रही
सेमिनार में वरिष्ठ पत्रकार अग्नि शेखर, रितेश वर्मा, सुमित कुमार सिंह, सौरभ कुमार, हरेराम दास, विजय कुमार झा, मनीष कुमार, निरंजन कुमार सिन्हा, चंदन कुमार, संताेष श्रीवास्तव, अिनल पतंग, नरेन्द्र कुमार सिंह, अविनाश कुमार, अशोक कुमार अमर, संजय सिंह, अजय कुमार झा, प्रशांत कुमार, नीलमणि झा, शगुफ्ता ताजवर, डाॅ. रामरेखा सिंह आदि ने भाग लिया।




