विद्वान नेताओं तक मानते हैं सूर्य ही जगत की आत्मा है:स्वामी चिदात्मन जी
बीहट। सच आज तक न्यूज़ संवाददाता यदुनंदन।
सिद्धाश्रम सिमरियाधाम में गोविंद हरे गोपाल हरे जय घोष के साथ रथ यात्रा के साथ पूज्य गुरुदेव स्वामी चिदात्मन जी महाराज के सानिध्य में भक्तों की टोली पूरे सिमरिया धाम क्षेत्र का परिक्रमा करते हुए द्वादश कुंभ स्नान बनाने के लिए राम जानकी घाट पहुंचे।जहां वेद समस्त ज्ञान विज्ञान के मूल उत्स है श्री राम राज्य में वैदिक संपदाओं के कारण किसी प्रकार का भय नहीं था। वेद में सूर्य चंद्र और गुरु का महत्व अति विशिष्ट है इसलिए एक राशि प्रयोग में प्रकृति में अति विशिष्ट आ जाती है। जल जीवन का आधार है जो विशेष अमृत तत्व को प्राप्त करता है ।स्वामी कहते हैं तत्वदर्शियों से लेकर विद्वान नेताओं तक सभी एक स्वर से स्वीकार करते हैं कि सूर्य ही जगत की आत्मा है। सूर्य से ही ब्रह्मांड उत्सर्जित है। भारत का इतिहास अरबों वर्ष प्राचीन है। मंत्र, तीर्थ, देव, द्विज संतों में भावना का ही प्रधानता है। शास्त्र के अनुसार 12 राशियों पर सूर्य एक-एक महीना रहते हैं जिसे शौर्य मांस यानी की संक्रांति कहते हैं , और चंद्रमा का समय लगभग ढाई दिनों तक रहता है। बृहस्पति प्रत्येक राशि पर एक वर्ष रहते हैं । जब एक ही राशि पर इन तीनों का योग होता है तो वह शास्त्र अनुसार कुंभ योग कहलाता है । यह प्रत्येक 12 वर्षों के बाद इस राशि पर पहुंचता है। रुद्राया मलोक् अमृतिकरण प्रयोग में वर्णित है जैसे मेष की संक्रांति में हरिद्वार उज्जैन वैशाख महीना में ब्रिज की संक्रांति में बद्रीनाथ धाम में ज्येष्ठ महीना में मिथुन की संक्रांति में जगन्नाथ धाम आषाढ़ महीना में कारक की संक्रांति में द्वारिका पुरी सावन मास में सिंह की संक्रांति में नासिक में भादवा माह में कन्याओं की संक्रांति में रामेश्वरम आसींद मास में तुला की संक्रांति में सिमरिया धाम कार्तिक महीना में वृश्चिक की संक्रांति में कुरुक्षेत्र अगहन महिना में धनु की संक्रांति में गंगासागर पोस्ट महीना में मकर की संक्रांति में प्रयाग माघ महीना में पुत्र की संक्रांति में कुंभ को फाल्गुन महीना में आसीन की संक्रांति में ब्रह्म कुंड चैत्र महीना में, राजा हर्षवर्धन के सौजन्य से इनमें से लुप्त कुंभ योग प्रयास पुनः आरंभ हुआ परंतु उनकी राज सीमा में ही सिमट कर रह गया। जिनमें आज चार जगह का कुंभ मेला विख्यात है। हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन, नासिक, इसलिए जो लोग आज के कुंभ योग में जगन्नाथ धाम में स्नान नहीं बना सके वह श्रद्धालु किसी कारण बस जगन्नाथ पुरी नहीं पहुंच सके वह द्वादश नाम से प्रसिद्ध मिथिला में द्वादश कुमार बनाकर जीवन सफल बना लिए।



