चैत्र नवरात्रि मां दुर्गा को निश्चित रूप से एक धार्मिक समारोह की है
, जो आयोजन विष्णु मंदिर मैं जाया देवी के द्वारा मैं दुर्गा को चैत्र नवरात्रि को कलश संकल्प करके पूजा आरती करते हैं वहीं के बाबा कपिल देव पंडित के द्वारा मंत्रों के विधि पूर्वक पूजा करवाते हैं यह विष्णु मंदिर बहुत प्रासिद्ध मंदिर हैं और यहां से मैं दुर्गा के द्वारा श्रद्धालु महिला को दुखहियारी को गोद भराई का रसम किया गया है और कोई खली हाथ मा के मंदिर से नहीं जाते हैं जो मैं में लेकिन श्रद्धा पूर्वक आते हैं यह दुर्गा मंदिर में वो उनको मनोकामना पूर्ण हो जाते हैं मैं को सेवा करने के बाद मैं आपको ताजा खबर बताने जा रहा हूं वैशाली जिला के मेहनर थाना अंतरगत चामरा गांव से एक महिला 7 वर्षों से बच्चे के लिए दार दार भटक रहे हैं वाह महिला जिसका नाम अंचल कुमारी पति संजीव सहनी है वह महिला घर छोड़कर बेगूसराय जिला अंतरगत भगवानपुर थाना क्षेत्र के औगान विष्णु मंदिर पहुंचे और अपना माता दुर्गा के सामने बच्चे के लिए अचरा फैलाकर गुहार लगाने लगे उसी मंदिर के पुजारी बाबा कपिल देव पंडित ने मैं दुर्गा से बातचित की और उनको क्लास संकल्प करवाकर नो दिनों के लिए स्थापित करवाए और मैं दुर्गा जो की शेयर पर सवार होकर खड़े हैं सभी दुखियारियों को दुख हरने वाले सेवा में लगे हुऎ हैं अंचल कुमारी जिसमें दो सोने के कलश और एक पीतल का दीया से दिखाई दे रहे हैं। कलश लाल कपड़े से ढके हुए हैं और उनके ऊपर फूल रखे हुए हैं। दीया जल रहा है और उसके आसपास दो थालियों में फूल और अन्य प्रसाद रखे हुए हैं। कलश: दो सोने के कलश केंद्र में हैं। वे लाल कपड़े से ढके हुए हैं और उनके ऊपर फूल रखे हुए हैं। कलशों को संभवत जल से भरा गया है ।और वे हिंदू धर्म में पवित्र माने जाते हैं। दीया: एक पीतल का दीया कलशों के सामने जल रहा है। दीया हिंदू धर्म में प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक है।थाली: दीये के आसपास दो थालियों में फूल और अन्य प्रसाद रखे हुए हैं। थालियों में कुछ फल भी दिखाई दे रहे हैं। जैसे कि एक नारियल और तुलसी कि हरी पत्तियाँ। दुर्गा मंदिर एक शांत और शांतिपूर्ण दृश्य प्रस्तुत करती है। कलशों, दीये और फूलों का संयोजन एक धार्मिक माहौल बनाता है। जिसमें सोने, लाल और हरे रंग के चमकीले रंग शामिल हैं।चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में किसी पूजा या धार्मिक समारोह ।जिसमें कलश और दीया बत्ती प्रमुख रूप से 9 दिन के लिए जलाया जाता हैं ।तीन लोग फर्श पर बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, पूजा या प्रार्थना में भाग ले रहे हैं। मंदिर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियों से सजा हुआ है,जो सोने और अन्य रंगों में चित्रित हैं। सामने एक छोटी वेदी है जिस पर मोमबत्तियाँ और अन्य धार्मिक वस्तुएँ रखी हुई है दो महिलाएँ हैं, जिनमें से एक ने नारंगी रंग की साड़ी पहनी है और दूसरी ने पीले रंग की। एक पुरुष है जो सफ़ेद टी-शर्ट पहने हुए है। वे सभी फर्श पर बैठे हुए हैं चैत्र नवरात्रि पूजा में भाग ले रहे हैं। मूर्तियाँ सोने और अन्य रंगों में चित्रित हैं। वेदी: सामने एक छोटी वेदी है जिस पर मोमबत्तियाँ और अन्य धार्मिक वस्तुएँ रखी हुई हैं। वेदी पर कुछ फूल और प्रसाद भी दिखाई दे रहे हैं। जैसे कि एक त्रिशूल, एक तलवार, और एक शेर की मूर्ति।एक शांत और शांतिपूर्ण दृश्य प्रस्तुत करती है। मंदिर की सजावट और लोगों की उपस्थिति से पता चलता है कि यह एक धार्मिक समारोह है। जिसमें सोने और नारंगी के चमकीले रंग शामिल हैं। जहाँ पूजा और धार्मिक अनुष्ठान दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। एक मंदिर के अंदर की है, जिसमें हिंदू देवता भगवान विष्णु की एक मूर्ति प्रमुखता से दिखाई दे रही है। मूर्ति सोने के रंग की है और उसमें कई भुजाएँ और सिर हैं। भगवान विष्णु के पीछे कई छोटे-छोटे सिरों की एक पंक्ति दिखाई दे रही है, जो संभवतः उनके विभिन्न अवतारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मूर्ति: भगवान विष्णु की मूर्ति में है। मूर्ति सोने के रंग की है और उसमें कई भुजाएँ और सिर हैं। भगवान विष्णु ने लाल और सोने की पोशाक पहनी हुई है और उनके गले में हार है। भगवान विष्णु के पीछे कई छोटे-छोटे सिरों की एक पंक्ति दिखाई दे रही है। जैसे कि राम, कृष्ण और बुद्ध। देवी दुर्गा की मूर्ति है। देवी दुर्गा लाल पोशाक पहने हुए हैं और उनके हाथ में तलवार है। मंदिर की दीवारें और छत पत्थर की बनी हुई हैं। छत पर कुछ रोशनी भी दिखाई दे रही है। रहस्यमय और आध्यात्मिक दृश्य प्रस्तुत करती है। सोने की मूर्ति और कई सिरों का संयोजन एक शक्तिशाली और दिव्य प्रभाव पैदा करता है। रंगों का उपयोग भी ध्यान देने योग्य है, जिसमें सोने, लाल और काले रंग के चमकीले रंग शामिल हैं। जहाँ भगवान विष्णु माता लक्ष्मी और देवी दुर्गा की पूजा की जाती है।



