वर्ष 2024 अलविदा के साथ नव वर्ष 2025 के आगमन पर कावर पक्षी विहार और जय मंगल गढ़ में उमड़ेगा पर्यटकों का सैलाब
सच आज तक संवाददाता अशोक कुमार ठाकुर की खास रिपोर्ट
बेगूसराय में बीते वर्ष के कुछ खट्टे और मीठे यादों के साथ 2024 के अलविदा के साथ ही नए साल के आगमन के जश्न को लेकर कर बेगूसराय जिले में विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी है। जिले के तमाम होटलों में नववर्ष के अवसर पर जश्न मनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई है। जिले के धार्मिक आस्थाओं के केंद्रों पर भी श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तैयारी की गई है। जयमंगला गढ़, हरिगिरी धाम, नौलखा मंदिर, सिमरिया गंगा धाम सर्वमंगला आश्रम, और काली स्थान जैसे प्रमुख स्थल नववर्ष के अवसर पर पूजा-अर्चना के लिए सज-धज कर तैयार है।
काबर झील और जयमंगलागढ़ में पर्यटकों का स्वागत
बिहार के पहले रामसर साइट काबर झील, जो एशिया में मीठे पानी की सबसे बड़ी झील मानी जाती है, नववर्ष के अवसर पर पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार किया गया है। काबर झील के पक्षी विहार और जयमंगलागढ़ वन क्षेत्र में पर्यटकों का आगमन बढ़ने का अनुमान है। यहां के मछुआरे अपनी नावों को पर्यटकों के लिए तैयार कर चुके हें , ताकि वे झील के सौंदर्य का आनंद ले सकें। कावर झील में सूर्योदय के समय कमल खिलने, मछलियों का तैरना और पक्षियों का चहचहाना पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इसके अलावा झील में वन भोज का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में बेगूसराय सहित विभिन्न जिलों के लोग आते हें। कबर और जयमंगलागढ़ के रमणीय दृश्य पर्यटकों को ही चलता है।
*यहां के धार्मिक और ऐतिहासिक आकर्षण*
बेगूसराय के धार्मिक स्थल भी नववर्ष के मौके पर श्रद्धालुओं से भरे रहते हें। विष्णुपुर नौलखा मंदिर जो महंत महावीर दास द्वारा 1953 में बनाया गया था इस समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वही मिथिला, मगध और अंग क्षेत्र का संगम स्थल सिमरिया गंगा धाम सर्वमंगला सिद्धाश्रम मां काली धाम में 64 योगिनी मंदिर स्थापित है। इस धाम को कुंभ स्थली के रूप में पुनर्जागृत करने वाले जिले के रुद्रपुर गांव के रहने वाले 72 वर्षीय संत परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज को1976 में मां जगदंबा का साक्षात दर्शन हुआ था। अब वहां से भक्ति का प्रकाश कोने- कोने में फैला रहे हें यह प्रमुख धार्मिक स्थल और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों के लिए एक आदर्श यात्रा स्थल है।
*कबर का अंतरराष्ट्रीय महत्व*
कावर झील को रामसर साइट घोषित करने के बाद इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान बन गई है। यहां 165 से अधिक प्रकार के पौधों और 394 से अधिक प्रकार की जीवों का बास है। जिनमें से 221 प्रकार की पक्षी प्रजातियां और देसी विदेशी है। जिला प्रशासन ने पर्यटकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष तैयारी कर रखी है।




