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बिहार में जातीय जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक बरकरार रखने पर प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार पर किया तंज, कहा - मैंने तो पहले ही कहा था, जातीय जनगणना राज्यों के अधिकार क्षेत्र में है ही नहीं

 बिहार में जातीय जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक बरकरार रखने पर प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार पर किया तंज, कहा - मैंने तो पहले ही कहा था, जातीय जनगणना राज्यों के अधिकार क्षेत्र में है ही नहीं

जातीय जनगणना पर प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं शुरुआती दौर से कहता आ रहा हूं कि सबसे पहले नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव से पूछा जाना चाहिए कि इसका कानूनी आधार क्या है? आज ये आम लोगों को आंख में धूल झोंकने के लिए सर्वे करवा रहे हैं। जातीय जनगणना का नतीजा आज क्या हुआ जिस दिन ये न्यायालय में गए न्यायालय ने इसे रोक दिया। जातीय जनगणना राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है। इन नेताओं को कोई जातीय जनगणना नहीं करवाना है। बिहार की जनता खुद सोच कर देखे कि नीतीश कुमार इतने लंबे समय से मुख्यमंत्री हैं इसके बाद भी उन्होंने आज तक जातीय जनगणना क्यों नहीं करवाया? RJD की सरकार थी, लालू यादव खुद 15 साल सरकार में थे, क्यों नहीं करवाया जातीय जनगणना? आज इन्हें ज्ञात हो रहा है? सच्चाई तो यह है कि इलेक्शन आने वाला है और कुछ होता हुआ दिख नहीं रहा है तो बाप-बाप कर रहे हैं। आज ये समाज को बांटने का काम कर रहे हैं इसके अलावा इनकी कोई मनशा नहीं है। पिछले 32 साल से लालू-नीतीश मुख्यमंत्री हैं उस समय उन्होंने जातीय जनगणना क्यों नहीं करवाया? अगर ये राज्य का मामला था तो पहले क्यों नहीं करवाया गया? सच्चाई तो यह है कि वो जातीय जनगणना है ही नहीं वो तो सर्वे है और इसको भी न्यायालय ने रोक दिया है। जातियों की राजनीति करनी है ताकि सारा समाज बटा रहे, सारा समाज अशिक्षित और अनपढ़ बना रहे, तभी तो 9वीं फेल को आज लोग उपमुख्यमंत्री मानेगा। बिहार के लोगों को समझने की जरूरत है कि अगर गरीब के बच्चे पढ़ लिख जाएंगे तो कौन इन अनपढ़ों को नेता मानेगा?

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